लोणी काळभोर में मुला-मुठा नदी पात्र में कचरे में लगी आग जारी

लोणी काळभोर (पुणे): क्षेत्र के मुला-मुठा नदी पात्र में अवैध रूप से डाले जा रहे कचरे में शुक्रवार सुबह भीषण आग लगने की घटना सामने आई। इस आग के कारण पूरे परिसर में जहरीले धुएँ के बड़े-बड़े गुबार फैल गए। सांस लेने में तकलीफ होने पर एमआईटी शिक्षण संकुल के कुछ विद्यार्थियों को शुक्रवार मध्यरात्रि के समय नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। आग पर काबू पाने के लिए एमआईटी शिक्षण संकुल के कर्मचारियों की मदद से अग्निशमन दल के प्रयास शनिवार को भी जारी रहे।

एमआईटी शैक्षणिक संकुल में वर्तमान में राज्य सहित देश-विदेश से आए लगभग 20,000 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनमें से करीब 5,000 विद्यार्थी और 1,000 कर्मचारी परिसर में ही निवास करते हैं। नदी पात्र में डाले गए कचरे में लगी आग को अग्निशमन दल शुक्रवार भर प्रयास करने के बावजूद पूरी तरह बुझा नहीं सका। परिणामस्वरूप रात में आग और भड़क गई तथा जहरीले धुएँ के घने गुबार पूरे क्षेत्र में फैल गए। इससे छात्रावासों और आसपास के नागरिकों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, गले में खराश जैसी समस्याएं होने लगीं। जहरीले धुएँ के कारण कुछ विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

जहरीली गैस के गुबार के कारण क्षेत्र में दृश्यता काफी कम हो गई, जिसका असर शनिवार तड़के पुणे-सोलापुर राजमार्ग के यातायात पर भी पड़ा। साथ ही, धुएँ की गंभीर स्थिति को देखते हुए क्षेत्र की एक कंपनी के कर्मचारियों और एमआईटी शैक्षणिक संकुल के विद्यार्थियों को शनिवार को अवकाश घोषित करना पड़ा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लोणी-काळभोर और कदमवाकवस्ती ग्राम पंचायत के सरपंच, जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य, पुलिस पाटिल तथा स्थानीय अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा कर हालात का जायजा लिया।

स्वच्छ भारत अभियान की पृष्ठभूमि में देशभर में स्वच्छता और नदी संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं लोणी काळभोर में पुणे शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली मुला-मुठा नदी के पात्र में बड़े पैमाने पर सीधे कचरा डालकर उसे जलाने की घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं। लोणी काळभोर और कदमवाकवस्ती, पुणे शहर से सटे घनी आबादी वाले ग्राम पंचायत क्षेत्र हैं। यहां प्रतिदिन भारी मात्रा में गीला और सूखा कचरा उत्पन्न होता है, किंतु कचरा संकलन एवं प्रसंस्करण के लिए उपयुक्त भूमि और तकनीकी परियोजना वर्तमान में उपलब्ध नहीं है।

इसी कारण प्रतिदिन लगभग 30 से 35 ट्रॉली से अधिक कचरा सीधे मुला-मुठा नदी पात्र में डाला जा रहा है। परिणामस्वरूप नदी पात्र में कचरे के बड़े-बड़े ढेर जमा हो गए हैं और क्षेत्र में तेज दुर्गंध फैल रही है। इससे नागरिकों के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। लगातार लग रही आग की घटनाओं के कारण वायु प्रदूषण भी अत्यधिक बढ़ गया है और लोगों को सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है।

नदी पात्र में कचरा डाले जाने से केवल वायु प्रदूषण ही नहीं, बल्कि जल प्रदूषण भी बढ़ रहा है और मुला-मुठा नदी का पानी दूषित हो रहा है। इससे जलीय जीवों के अस्तित्व पर भी खतरा उत्पन्न हो गया है। पर्यावरण की दृष्टि से यह स्थिति अत्यंत गंभीर है, ऐसा मत पर्यावरण प्रेमियों ने व्यक्त किया है।

कोट

लोणी-काळभोर और कदमवाकवस्ती दोनों ग्राम पंचायतों ने पूर्व में कई बार ठोस कचरा प्रबंधन के लिए अलग भूमि उपलब्ध कराने हेतु जिला परिषद और जिलाधिकारी को प्रस्ताव भेजे हैं, जो अभी तक शासन स्तर पर लंबित हैं। यदि शासन द्वारा तत्काल भूमि उपलब्ध कराई जाती है तो वहां ठोस कचरा प्रबंधन परियोजना स्थापित की जा सकती है। इससे मुला-मुठा नदी पात्र में सीधे कचरा डालना बंद होगा और पर्यावरण संरक्षण के साथ नागरिकों का स्वास्थ्य सुरक्षित रह सकेगा।

चित्तरंजन गायकवाड़, पूर्व सरपंच, कदमवाकवस्ती ग्राम पंचायत

पुणे शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली मुला-मुठा नदी के पात्र में सीधे कचरा डालना अत्यंत गंभीर विषय है। नदी पात्र में कचरे के पहाड़ खड़े हो गए हैं और उनमें बार-बार आग लगने की घटनाएं हो रही हैं। इससे उठने वाले जहरीले धुएँ के कारण विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को श्वसन संबंधी समस्याएं हो रही हैं। जिला प्रशासन को इस विषय को गंभीरता से लेते हुए तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। नदी पात्र में अवैध रूप से कचरा डालना तुरंत बंद कराया जाए तथा स्थानीय ग्राम पंचायतों की ठोस कचरा प्रबंधन परियोजना के लिए शीघ्र भूमि उपलब्ध कराई जाए।

– डॉ. महेश चोपड़े,
कुलसचिव, एमआईटी एडीटी विश्वविद्यालय, लोणी-काळभोर, पुणे।